नई दिल्ली। देश की ऊर्जा सुरक्षा में कोयला आज भी एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। यह इस्पात और सीमेंट जैसे प्रमुख उद्योगों को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर आर्थिक विकास को आधार प्रदान कर रहा है।
देश में कोयले का उत्पादन उपभोक्ताओं की मांग के अनुरूप तेज़ी से बढ़ रहा है। रेलवे के सहयोग से खदानों में पर्याप्त भंडार तैयार किया जा रहा है, ताकि जरूरत के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की खानों में कोयले का भंडार 1 अप्रैल 2025 को 106.78 मीट्रिक टन था, जो 18 मार्च 2026 तक बढ़कर लगभग 125.54 मीट्रिक टन हो गया है।
सिंगारेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) की खानों में करीब 5.75 मीट्रिक टन कोयला उपलब्ध है, जबकि कैप्टिव और वाणिज्यिक खानों में 15.75 मीट्रिक टन कोयले का भंडार है। इसके अलावा लगभग 12 मीट्रिक टन कोयला परिवहन में है और 5.49 मीट्रिक टन बंदरगाहों व माल भंडार में मौजूद है।
बिजली संयंत्रों में पहले से मौजूद कोयले का भंडार लगभग 53.41 मीट्रिक टन है, जो वर्तमान खपत दर के अनुसार करीब 23 दिनों की जरूरत को पूरा करने में सक्षम है।
सीआईएल ने मार्च 2026 में लगभग 23.56 मीट्रिक टन कोयले की पेशकश के साथ 29 ई-नीलामियों की योजना बनाई है। इनमें से 12 मार्च तक 5 नीलामियां आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें 73.1 लाख टन कोयले की पेशकश की गई और 31.96 लाख टन की बुकिंग हो चुकी है।
सीआईएल राज्य नामित एजेंसियों (एसएनए) के माध्यम से लघु, मध्यम और अन्य उपभोक्ताओं को कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है। साथ ही, राज्यों से अतिरिक्त मांग की जानकारी मांगी गई है ताकि ऊर्जा की कमी से बचा जा सके।
कोयला मंत्रालय लगातार नीतिगत सुधार, सुदृढ़ निगरानी और हितधारकों की भागीदारी के जरिए एक पारदर्शी और प्रभावी इकोसिस्टम बनाने पर काम कर रहा है।
इन प्रयासों का उद्देश्य देश में कोयले की विश्वसनीय उपलब्धता सुनिश्चित करना, प्रमुख क्षेत्रों में निर्बाध संचालन बनाए रखना और बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करना है, ताकि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।