नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 पारित होने पर राज्य की जनता और सरकार को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता भारतीय जनता पार्टी का स्थापना काल से ही संकल्प रहा है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा शासित राज्य हर नागरिक के लिए समान कानून स्थापित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार ने बुधवार को असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक-2026 पारित करा लिया। इसके साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी लागू करने वाला देश का तीसरा और पूर्वोत्तर का पहला राज्य बन गया है। विपक्ष की ओर से विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग और हंगामे के बावजूद इसे सदन से मंजूरी मिल गई।
अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “असम की जनता को बधाई। समान नागरिक संहिता भाजपा की स्थापना के समय से ही उसका संकल्प रहा है।” उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देशभर में कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस अवसर पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और विधेयक का समर्थन करने वाले सभी विधायकों को भी बधाई दी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी असम सरकार को बधाई देते हुए कहा कि असम विधानसभा में यूसीसी कानून का पारित होना विकसित, समरस और सशक्त भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड से निकली यूसीसी की धारा अब पूरे देश में आगे बढ़ रही है। धामी ने कहा कि यह बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के समानता और न्याय आधारित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
यूसीसी कानून के तहत विवाह, तलाक, अलगाव, उत्तराधिकार, संपत्ति के बंटवारे और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी। विधेयक में बहुविवाह और एक से अधिक शादी पर रोक लगाने का भी प्रावधान किया गया है, जबकि लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
गौरतलब है कि 2026 के असम विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने यूसीसी को अपने प्रमुख चुनावी वादों में शामिल किया था। इसी महीने राज्य मंत्रिमंडल की पहली बैठक में यूसीसी के मसौदे को मंजूरी दी गई थी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कानून को “ऐतिहासिक” बताते हुए विधानसभा के सभी सदस्यों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि अब इस विधेयक को पहले असम के राज्यपाल के पास भेजा जाएगा और उसके बाद अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।