रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आगामी 5 नवंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम के आयोजन को लेकर वित्तीय स्वीकृति और निर्णय प्रक्रिया पर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली से कार्यक्रम के लिए 15 लाख रुपये प्राप्त होने के बावजूद लगभग 10 लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृति दी गई है।
इस वित्तीय निर्णय को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या अतिरिक्त राशि की स्वीकृति से पहले काउंसिल की आमसभा की विधिवत अनुमति ली गई थी? आरोप है कि आमसभा की बैठक आयोजित किए बिना ही अतिरिक्त राशि खर्च करने का निर्णय लिया गया। यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि जब रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में अपेक्षाकृत कम खर्च में बेहतर आयोजन किया जा सकता था, तो अधिक राशि खर्च करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
मामले में आमसभा के निर्णयों और कार्यवाही विवरण (मिनट्स) को लेकर भी विवाद सामने आया है। आरोप है कि आमसभा में बहुमत से लिए गए निर्णय और अध्यक्ष की ओर से अनुमोदन के बावजूद रजिस्ट्रार द्वारा अब तक मिनट्स जारी नहीं किए गए हैं। इससे काउंसिल की निर्णय प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लाइसेंस विवाद में भी उठे सवाल
दूसरी ओर, फार्मासिस्ट अभिषेक चंद्रा का प्रकरण भी चर्चा में है। उन्होंने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि काउंसिल के अध्यक्ष अरुण मिश्रा और रजिस्ट्रार अश्वनी गुरुद्वेकर के माध्यम से उन पर दबाव बनाया जा रहा है। उनके लाइसेंस संबंधी मामले में रजिस्ट्रार की व्यक्तिगत आपत्ति और उसकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
शासन से निष्पक्ष जांच की मांग
फार्मासिस्टों से जुड़े लोगों ने शासन से मांग की है कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया से प्राप्त 15 लाख रुपये के अनुदान, अतिरिक्त 10 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति, आमसभा की अनुमति और संपूर्ण खर्च प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही आमसभा के निर्णयों के मिनट्स जारी नहीं किए जाने के कारणों की पड़ताल हो।
अभिषेक चंद्रा द्वारा लगाए गए दबाव के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाने की मांग की गई है। फार्मासिस्टों का कहना है कि काउंसिल का प्राथमिक दायित्व प्रदेश के फार्मासिस्टों की समस्याओं का समाधान, लाइसेंस संबंधी मामलों में निष्पक्षता और संस्था की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। ऐसे में वित्तीय निर्णयों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का जवाब देना जरूरी है।