नई दिल्ली। राज्यसभा में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर सरकार की रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सरकार ईंधन के किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है और घरेलू गैस सप्लाई में एलपीजी के साथ-साथ पीएनजी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दशक में देश में पीएनजी कनेक्शन के विस्तार में अभूतपूर्व प्रगति हुई है और हाल के वर्षों में इस गति को और तेज किया गया है। साथ ही एलपीजी के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के प्रयास भी लगातार जारी हैं, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार का लगातार प्रयास रहा है कि हर क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम हो और भारत आत्मनिर्भर बने। मौजूदा समय में देश का 90% से अधिक व्यापार विदेशी जहाजों पर निर्भर है, जो किसी वैश्विक संकट में चुनौती बन सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए ‘मेड इन इंडिया’ जहाज निर्माण के लिए करीब 70 हजार करोड़ रुपए का अभियान शुरू किया गया है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत शिप बिल्डिंग, शिप ब्रेकिंग और मेंटेनेंस-ओवरहॉलिंग जैसी सुविधाओं के विकास पर तेजी से काम कर रहा है। बीते वर्षों में हुए प्रयासों का परिणाम है कि देश अब अपनी जरूरत के अधिकांश हथियारों का निर्माण खुद कर रहा है।
उन्होंने कहा कि एक समय भारत जीवन रक्षक दवाओं के कच्चे माल (एपीआई) के लिए काफी हद तक विदेशों पर निर्भर था, लेकिन अब देश में ही एपीआई इकोसिस्टम विकसित करने के लिए व्यापक प्रयास किए गए हैं। इसी तरह रेयर अर्थ मिनरल्स में विदेशी निर्भरता कम करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है और इससे उबरने में समय लगेगा। भारत पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े, इसके लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप का गठन किया है, जो नियमित रूप से बैठकर इंपोर्ट-एक्सपोर्ट से जुड़ी चुनौतियों का आकलन करता है। सरकार शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म रणनीतियों के तहत हालात पर नजर बनाए हुए है।