सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का रिकॉर्ड मुनाफा, 1.98 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ

नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज करते हुए 1.98 लाख करोड़ रुपए का सर्वकालिक उच्च शुद्ध लाभ अर्जित किया है। यह लगातार चौथा वर्ष है, जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लाभ में रहे हैं। बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, मजबूत ऋण वृद्धि और परिचालन दक्षता में सुधार ने बैंकों के प्रदर्शन को मजबूती दी है।
कुल कारोबार और ऋण वृद्धि में मजबूत बढ़ोतरी
31 मार्च 2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल कारोबार 12.8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 283.3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इस दौरान कुल जमा राशि 10.6 प्रतिशत बढ़कर 156.3 लाख करोड़ रुपए हो गई, जबकि सकल अग्रिम ऋण राशि 15.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 127 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। खुदरा ऋण में 18.1 प्रतिशत, कृषि ऋण में 15.5 प्रतिशत और एमएसएमई ऋण में 18.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो वित्तीय समावेशन और उद्यमिता को समर्थन देने में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका को दर्शाती है।
एनपीए ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) अनुपात घटकर 1.93 प्रतिशत रह गया, जबकि शुद्ध एनपीए अनुपात 31 मार्च 2026 तक घटकर 0.39 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 90 प्रतिशत से अधिक का प्रोविजनिंग कवरेज अनुपात बनाए रखा, जो बेहतर जोखिम प्रबंधन, विवेकपूर्ण प्रोविजनिंग और मजबूत बैलेंस शीट को दर्शाता है।
वसूली तंत्र और लाभप्रदता में सुधार
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान नए बकाया ऋण में लगातार कमी आई और बकाया अनुपात घटकर 0.7 प्रतिशत रह गया। बट्टे खाते में डाले गए खातों से वसूली सहित कुल रिकवरी 86,971 करोड़ रुपए रही। इसी दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल परिचालन लाभ बढ़कर 3.21 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया, जबकि शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 11.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
पूंजी स्थिति और डिजिटल सुधारों से बढ़ी मजबूती
31 मार्च 2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल सीआरएआर (पूंजी से जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात) बढ़कर 16.6 प्रतिशत हो गया, जो नियामकीय आवश्यकता 11.5 प्रतिशत से काफी अधिक है। यह सुधार आंतरिक संसाधनों, संचित आय और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जुटाई गई 50,551 करोड़ रुपए की पूंजी के कारण संभव हुआ। वहीं, लागत-से-आय अनुपात 49.67 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो बेहतर लागत प्रबंधन, प्रौद्योगिकी आधारित प्रणाली और डिजिटल परिवर्तन पहलों का परिणाम माना जा रहा है।
विकसित भारत के लक्ष्य में निभाएंगे अहम भूमिका
सरकार की ओर से बेहतर शासन व्यवस्था, प्रौद्योगिकी अपनाने, ऋण अनुशासन बढ़ाने और औपचारिक ऋण तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने जैसे सुधारों ने बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत किया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अब बेहतर पूंजी, मजबूत लाभप्रदता और सुदृढ़ संस्थागत क्षमता के साथ भारत की विकास आकांक्षाओं को समर्थन देने की स्थिति में हैं और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।