विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा बेहद जरूरी: अनिल काकोडकर

नई दिल्ली। देश के प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक और अनिल काकोडकर ने भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में हालिया प्रगति को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए परमाणु ऊर्जा की भूमिका बेहद अहम होगी।
उन्होंने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनकी अनिश्चित प्रकृति के कारण स्थिर “बेस लोड” बिजली की जरूरत होती है, जिसे केवल परमाणु ऊर्जा ही स्वच्छ तरीके से पूरा कर सकती है।
काकोडकर के अनुसार, यदि भारत को विकसित देशों के बराबर या उससे बेहतर जीवन स्तर हासिल करना है, तो प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत को मौजूदा स्तर से लगभग चार गुना बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि यह अतिरिक्त ऊर्जा भी स्वच्छ स्रोतों से ही आनी चाहिए, ताकि जलवायु लक्ष्यों को भी पूरा किया जा सके।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के सामने दोहरी चुनौती है, एक ओर 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करना और दूसरी ओर विकास की खाई को तेजी से पाटना।
भारत के परमाणु कार्यक्रम पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश को सीमित यूरेनियम संसाधनों से आगे बढ़कर अपने विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करना होगा। भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम संसाधनों में से एक है, जो भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा का दीर्घकालिक आधार बन सकता है।
काकोडकर ने 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) को बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे भारत रूस के बाद इस स्तर की तकनीक हासिल करने वाला दूसरा देश बन गया है। उन्होंने कहा कि यह रिएक्टर न केवल बिजली उत्पादन करता है, बल्कि परमाणु ईंधन तैयार करने में भी मदद करता है, जिससे ऊर्जा संसाधनों का विस्तार होता है।
उन्होंने बताया कि भारत 2047 तक “विकसित भारत” बनने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन मौजूदा तकनीकों के साथ परमाणु क्षमता दोगुनी करने में 30–35 साल लग सकते हैं। इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए देश मेटालिक फ्यूल तकनीक और उन्नत रीसाइक्लिंग सुविधाओं पर काम कर रहा है।
सरकार के लक्ष्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत 100 गीगावाट परमाणु क्षमता हासिल करने के मिशन पर काम कर रहा है, जिसमें स्वदेशी प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) अहम भूमिका निभाएंगे। राजस्थान और कुडनकुलम में नई इकाइयों के शुरू होने के बाद देश जल्द ही 10,000 मेगावाट क्षमता के आंकड़े को पार कर सकता है।
काकोडकर ने यह भी कहा कि भारत में परमाणु ऊर्जा को लेकर राजनीतिक स्तर पर व्यापक समर्थन रहा है और भविष्य में भी इसके विस्तार की संभावनाएं मजबूत हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ना होगा, ताकि आने वाले दशकों में स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।