साधना सप्ताह-2026’ में 3.18 करोड़ लोगों की भागीदारी ने रचा रिकॉर्ड, डॉ. जितेंद्र सिंह ने उत्कृष्ट प्रदर्शन को सराहा

नई दिल्ली। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्वतंत्र प्रभार) और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने “साधना सप्ताह-2026” समारोह में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों, विभागों और राज्यों को सम्मानित किया। उन्होंने इसे शासन में क्षमता निर्माण और परिणाम-आधारित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने वाला अहम कदम बताया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पुरस्कार प्रणाली को व्यक्तिगत प्रोफाइलिंग से हटाकर अब प्रमुख कार्यक्रमों के प्रदर्शन और जिला स्तर की चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित किया गया है। यह बदलाव शासन में परिणाम-आधारित मूल्यांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
उन्होंने बताया कि सप्ताह भर चलने वाली इस पहल में 3.18 करोड़ से अधिक लोगों ने पाठ्यक्रम पूरे किए, जिनमें करीब 47 लाख सरकारी कर्मचारी शामिल थे। इनमें से 33 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने निर्धारित चार घंटे का प्रशिक्षण पूरा किया, जो सतत शिक्षा की दिशा में बड़े बदलाव को दर्शाता है।
जितेंद्र सिंह ने “साधना सप्ताह” को जन-प्रेरित आंदोलन बताते हुए कहा कि इससे ऐसी संस्कृति विकसित हुई है, जहां अधिकारी मजबूरी नहीं बल्कि पेशेवर प्रतिबद्धता के तहत सीखने में भाग ले रहे हैं। इससे सिविल सेवाओं में आत्म-सुधार और पेशेवर गौरव को बढ़ावा मिला है।
उन्होंने कहा कि इस पहल में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ ग्रुप C और D के कर्मचारी तथा फ्रंटलाइन कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। यह दर्शाता है कि क्षमता निर्माण में पदानुक्रम से ऊपर उठकर काम करना जरूरी है, जिससे सेवा वितरण और जन विश्वास मजबूत होता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर उनकी भूमिका से नागरिक सेवाओं में सुधार तेजी से दिखाई देता है।
उन्होंने क्षमता निर्माण आयोग के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि इस संस्था ने व्यापक पहुंच और सहयोग को बढ़ावा दिया है। निजी क्षेत्र की भागीदारी से भी इस दिशा में गति मिली है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार अब प्रशिक्षण के दायरे को विज्ञान प्रशासकों और शिक्षाविदों तक बढ़ा रही है। साथ ही सांसदों और मंत्रियों के लिए भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों को भविष्य के शासन का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि कर्मचारियों को नई दक्षताओं को तेजी से अपनाना होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक मानव विवेक का विकल्प नहीं बल्कि पूरक होनी चाहिए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह की पहलें मिशन कर्मयोगी के तहत निरंतर सीखने की संस्कृति को मजबूत करती हैं और शासन को अधिक प्रभावी बनाती हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार क्षमता निर्माण को एक सतत प्रक्रिया के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है, जिससे सीखने के परिणाम सीधे शासन के प्रदर्शन से जुड़े रहें और सिविल सेवाएं भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हों।